मुनाफ़ा कमाने का जरिया नहीं बन सकते निजी विश्वविद्यालय एवं संस्थान - सुप्रीम कोर्ट

मुनाफ़ा कमाने का जरिया नहीं बन सकते निजी विश्वविद्यालय एवं संस्थान - सुप्रीम कोर्ट

द जागरण न्यूज, नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के निजी विश्वविद्यालयों की मनमानी और वित्तीय अनियमितताओं पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। जस्टिस अहसनुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने दो-टूक कहा है कि कोई भी निजी विश्वविद्यालय मुनाफा कमाने वाली व्यावसायिक संस्था के रूप में नहीं चल सकता। कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी निजी विश्वविद्यालयों के पिछले 5 वर्षों के कामकाज और ऑडिटेड वित्तीय खातों का पूरा हिसाब अदालत में पेश करें।

अदालत ने झारखंड समेत सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 6 सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने सरकारों को स्पष्ट चेतावनी दी कि संस्थान जो जानकारी दें, आंख मूंदकर उसे आगे न बढ़ाएं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल कर जमीनी जांच करें और गड़बड़ी मिलने पर कड़ी कार्रवाई करें।

इन बिंदुओं पर देना होगा पूरा ब्योरा:

  • फीस व सरप्लस फंड: दाखिले के समय और कोर्स के दौरान ली जाने वाली फीस, इंफ्रास्ट्रक्चर व डेवलपमेंट फंड की वसूली तथा सरप्लस फंड के निवेश की पूरी जानकारी देनी होगी।

  • एडमिशन व परीक्षा प्रणाली: दाखिला प्रक्रिया की जवाबदेही, प्रश्न पत्र तैयार करने, परीक्षा संचालन और कॉपियों के मूल्यांकन का पूरा सिस्टम स्पष्ट करना होगा।

  • शिक्षकों की कक्षाएं व वेतन: जनवरी 2025 से फैकल्टी को आवंटित कक्षाओं और वास्तव में ली गई क्लास का रिकॉर्ड, गैर-शैक्षणिक स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया और वेतन भुगतान व्यवस्था का हिसाब देना होगा।

  • शिकायत निवारण: पिछले 3 सालों में छात्रों या स्टाफ से मिली शिकायतों और उनके निपटारे का ब्योरा अनिवार्य किया गया है।